Sunday, September 28, 2014

रेडिओ - एक अनुभव ...



रेडिओ - एक अनुभव ...
कार्टूनिस्ट पवन को कुछ ख्याल आया होगा - रेडिओ मिर्ची के दफ्तर में उन्होंने वहां मेरा नाम बुदबुदाया होगा - फिर उसी वक़्त 'उत्पल' ने मुझे बुला लिया - वो भी लाईव प्रोग्राम के लिए - बाद में पता चला 'उत्पल' काफी दिनों से मुझे पढ़ते आ रहे हैं ! 
अपने साथ गीतों के एक लिस्ट के साथ - समय पर पहुँच गया - सिर्फ एक दो लोगों को पता था - हालांकी सुबह थोडा उत्साहित होते हुए - एक छोटा पोस्ट डाला - कुछ ही मिनट में डिलीट कर दिया ! 
स्टूडियो पहुंचते ही - उत्पल और रेडिओ जॉकी 'शशी' ने स्वागत किया और गीतों को लेकर अपने कुछ नियम कानून बताये - गीत पुराने ही बजने थे - उत्पल कुछ प्रश्न भी तैयार कर रखे थे जो उन्होंने शशी को दे दिया ! 
स्टूडियो का रूख पटना के छज्जुबाग की तरफ था - स्टूडियो की ऊँची कुर्सी पर बैठते ही - ऐसा लगा जैसे बिहार / पटना अब मुझे सुनने जा रहा है ..:)) बेहतरीन अनुभव ...पुराने गीत बजने लगे - हर गीत के साथ कुछ 'शब्द' - यहीं दालान से लिए हुए ! शशी भी दालान को थोडा पढ़ कर आये थे - 'शब्द' कैसे जलते हैं और फिर कोई कैसे मोम से पत्थर बनता है ...गीत 'प्रेम' के इर्द गिर्द घुमते हैं - जीवन के इस मोड़ पर ..शशी के साथ ओन द रिकोर्ड और ऑफ द रिकोर्ड - अपने नज़र से प्रेम / जीवन दर्शन की व्याख्या करने में मजा आया - तब तक पवन भी पहुँच गए - वो अपने लैपटॉप पर 'कार्टून' के साथ - कॉफ़ी के साथ साथ - ढेर सारे गीत और 'उत्पल - शशी' के साथ गप्प ...तीनो 'भईया' ही कह कर संबोधित कर रहे थे ..थोड़ा बुजुर्ग जैसा अनुभव ..कोई नहीं ..:)) 
ढेर सारे पसंदीदा गीत बिहार / पटना को सुनवाने का मौका मिला - हमराज़ / पाकीज़ा / मुगले आज़म / कभी - कभी / एक दूजे के लिए / खामोशी / अभिमान / साजन बिना सुहागन के गीत - हर गीत के साथ एक कहानी और मेरी अपनी व्याख्या ...:)) 
उत्पल ने 'दालान' के बारे में खुल कर बोलने की छुट दे रखी थी - पर अब अपने मुख से 'दालान' की क्या चर्चा करता ..सो गीतों में ही उलझा रहा ...:)) 
शो लाईव था - शो रेडिओ जॉकी का होता है - उन्होंने कुछ गाने अपने नियम को ताक पर रख कर भी बजवाया - बीच शो में - कभी कभी का गीत मैंने डलवाया ..:)) 
शो के बाद - उत्पल / पवन / शशी के ढेर सारे गप्प - उत्तरप्रदेश - बिहार की राजनीति से लेकर - रेडिओ मिर्ची के गेस्टों की चर्चा ...फिर ..युवा पीढी ..बिना मैगी खिलाये मुझे कैसे विदा देती ...सो मैगी खाया ..भरपेट ...:)) 
थैंक्स ..पवन ...थैंक्स उत्पल ..थैंक्स शशी ...:)) 
थैंक्स ..फेसबुक ...'दालान' को बेपनाह चाहनेवाले दोस्त और प्रशंसक ...कौन कहता है ..यह दुनिया झूठी है ...जरा मेरी नज़रों ने इस दुनिया को देखो ....
थैंक्स 'मार्क'...थैंक्स 'इंटरनेट' ...ना तुम होते ...ना मेरा 'दालान' होता ...:))

@RR - 24 Feb - 2014 

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