Friday, October 23, 2009

आज खरना है - कल्ह सँझिया अरग !!!

आज खरना है - शाम को खरना का प्रसाद खाने अपने मित्र अभय के घर जाऊँगा ! मदर डेयरी के दुकान में सब्जी नहीं आ रहा है - किराना वाला होम डेलिवरी नहीं कर रहा है - कहता है - सभी वर्कर बिहार चले गए हैं ! मुझे लगता है - अब "छठ पूजा" को राष्ट्रिये अवकाश घोषित कर देना चाहिए ! संजय निरुपम हर साल की तरह इस साल भी मुंबई में पूजा मना रहे हैं ! पटना के अखबार छठ पूजा के समाचार और तैयारियां की खबरों से रंगे पड़े हैं ! पढ़ कर अछ्छा लगता है ! दिल्ली वाले अखबार भी ! न्यूज़ चैनल में बहुत बिहारी भरे पड़े हैं - सो सभी कुछ न कुछ समाचार या रिपोर्ट जरुर डालेंगे ! आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कुछ खबर छपा है - एक सांस में पढ़ डाला - ऐसा लगा - यही अपना है - बाकी सब पराया !




दादी पूजा करती थी ! अब मेरे घर में कोई नहीं करता है ! लेकिन छठ पूजा एकदम से खून में समाया हुआ है ! गाँव , पटना याद आने लगता है और मै भावुक हो जाता हूँ ! हम बिहारी मजदूर होते हैं - एक यही पर्व है जिसमे हम सभी अपने मिटटी को याद कर मिटटी की सुगंध पाने के लिए गाँव जाते हैं ! मालूम नहीं कब मै मजदूर से एलिट बन गया और गाँव जाना बंद हो गया - पर खून को कैसे बदल दूँ ??



बड़ा ही महातम का पर्व है - बच्चों को अपने संस्कृति और सभ्यता से वाकिफ कराने को तत्पर रहता हूँ - डर लगा रहता है -



आज नीतिश भी अपने किसी "नालंदा" वासी मित्र के यहाँ प्रसाद खाने जायेंगे !

रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !

1 comment:

Fighter Jet said...

bada accha laga padhe ke.is saal mai bhi chat me ghar gaya tha...:0bade dino bad!